Tuesday, November 26, 2019

फूलगोभी की खेती | उन्नत तकनीक से करें फूलगोभी की खेती

सब्जियों में फूलगोभी का उत्तर भारत में एक बहुत बड़ा महत्व है इसी कारण से उत्तर भारत में फूलगोभी की खेती बहुत बड़े मात्रा में की जाती है, फूलगोभी का प्रयोग हम सब्जी,सूप, सलाद,अचार, बिरियानी और पकौड़ा बनाने के लिए करते हैं । उत्तर भारत में फूलगोभी की खेती पूरे साल की जाती हैI इसमे विटामिन बी, विटामिन ए, विटामिन सी, प्रोटीन और कैल्शियम भी पाया जाता है। सही तरीके से खेती कर किसान इससे अत्याधिक लाभ उठा सकते हैI


जलवायु जलवायु : फूलगोभी के खेती के लिए ठंडी तथा आर्द्र जलवायु सर्वोत्तम होती हैI अधिक ठंढा फूलों को नुकसान पहुंचा सकता है | अच्छी फसल के लिए 15 से 20 डिग्री तापमान सर्वोत्तम होता हैI फूलगोभी की खेती प्राय: जुलाई से शुरू होकर अप्रैल तक होती हैI भूमि: दोमट और बलुई दोमट मिट्टी फूलगोभी के खेती के लिए अच्छी होती हैI भूमि में जैविक खाद पर्याप्त मात्रा में होनी चाहिए I फूलगोभी को मौसम के आधार पर तीन प्रकार की प्रजातियाँ में बांटा गया है। जैसे की अगेती, मध्यम और पछेती।


अगेती प्रजातियाँ : पूसा दिपाली, अर्ली कुवारी, अर्ली पटना, पन्त गोभी- 2, पन्त गोभी- 3, पूसा कार्तिक, पूसा अर्ली सेन्थेटिक, पटना अगेती, सेलेक्सन 327 एवं सेलेक्सन 328, पूसा, समर किंग, पावस, इम्प्रूब्ड जापानी, कुंवारी 327, कुंवारी 351, 234 एस।

मध्यम प्रकार की प्रजातियाँ : पन्त शुभ्रा, हिसार 114, एस-1, नरेन्द्र गोभी 1, पंजाब जॉइंट ,अर्ली स्नोबाल, पूसा हाइब्रिड 2, पूसा अगहनी, पटना मध्यम, पंत सुभ्रा,पूसा सुभ्रा, पूसा सिन्थेटिक, पूसा स्नोबाल, पूसा अगहनी, सैगनी, हिसार नं.-१, पूसा अगहनी, जाइंट स्नोबाल, पछेती प्रजातियाँ : स्नोबाल 16, पूसा स्नोबाल 1 aur 2, दानिया, स्नोकिंग, पूसा सेन्थेटिक, विश्व भारती, बनारसी मागी, पूसा हाइब्रिड – 2,पूसा हाइब्रिड 5, पूसा हिम ज्योति।

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